
वाराणसी। काशी के हनुमान घाट स्थित कांची कामकोटीश्वर मंदिर में आयोजित श्री शुक्ल यजुर्वेद माध्यन्दिन शाखा कण्ठस्थ दंडक्रम पारायण का द्वितीय दिवस श्रद्धा, अनुशासन एवं वैदिक परंपरा के गरिमामय वातावरण में मंगलवार को संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में विशेष रूप से प्रोफेसर राकेश उपाध्याय जी तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के काशी प्रांत के सह-कार्यवाह श्री दीनदयाल जी की उपस्थिति रही।
इस अवसर पर सनातन धर्म की रक्षा और भारतीय संस्कृति की निरंतरता में वेदों के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए यह प्रतिपादित किया गया कि सनातन परंपरा की रक्षा वेदों के संरक्षण, संवर्धन और उनके अनुशीलन से ही संभव है।
पारायणकर्ता चिरंजीव अद्वैत एवं चिरंजीव समर्थ काकड़े ने अत्यंत सुंदर ढंग से वेदपाठ प्रस्तुत किया। दोनों बालकों ने शुद्ध उच्चारण, स्वर, क्रम तथा एकाग्रता के साथ दंडक्रम पारायण कर उपस्थित विद्वानों एवं श्रोताओं को प्रभावित किया।
कार्यक्रम में वेदभास्कर प्रशांत जोशी गुरुजी एवं वेदमूर्ति किरण पाठक गुरुजी ने परीक्षक के रूप में अपनी भूमिका निभाई। इस अवसर पर आचार्य के वेंकटरमण घनपाठी जी सहित अन्य विद्वानों की उपस्थिति भी रही।
कार्यक्रम का संयोजन वेदमूर्ति गजानन ज्योतकर गुरुजी एवं श्री शैलेंद्र काकड़े गुरुजी ने किया। आयोजन का प्रमुख उद्देश्य शुक्ल यजुर्वेद माध्यन्दिन शाखा की प्राचीन मौखिक परंपरा को संरक्षित करना तथा नई पीढ़ी में वेदों के प्रति श्रद्धा बढ़ाना है।

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