वाराणसी।डोमरी, रामनगर, वाराणसी स्थित आचार्य सीताराम चतुर्वेदी महिला महाविद्यालय मे देश के प्रथम उप प्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल जी के जयंती के अवसर पर एक दिवसीय संगोष्ठी: राष्ट्रीय एकता के सूत्रधार सरदार वल्लभभाई पटेल आयोजित किया गया। सर्वप्रथम महाविद्यालय की छात्राओं द्वारा कुलगीत प्रस्तुत किया गया।

सरदार वल्लभभाई पटेल जी, आचार्य सीताराम चतुर्वेदी जी के चित्र पर तथा मां सरस्वती के मूर्ति पर मुख्य अतिथि प्रो. श्रीनिवास ओझा, अवकाश प्राप्त आचार्य, संस्कृत विभाग, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी, महाविद्यालय की निदेशिका एवं पूर्व कुलपति, जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय, बलिया, उ0 प्र0 प्रो. कल्पलता पांडेय तथा महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. विजय शंकर मिश्र ने माल्यार्पण कर संगोष्ठी का शुभारंभ किया।

संगोष्ठी में महाविद्यालय के शिक्षक डॉ. अभिजीत एवं छात्राएं आस्था ओझा, साक्षी सिंह आदि ने सरदार जी के बारे में अपने-अपने विचार व्यक्त किये।

मुख्य अतिथि प्रो. श्रीनिवास ओझा जी ने संगोष्ठी में कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल का देश के स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि सरदार जी अपने माता-पिता के योग्य सन्तान थे। योग्य संतान का होना बड़े गौरव व भाग्य की बात होती है। स्वतंत्रता के पश्चात देश के एकीकरण में सरदार जी की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने छोटे-छोटे राज्यों को स्वतंत्रता के पश्चात अपने विवेक, साहस व संयम से देश में शामिल किया। वह सच्चे देश भक्त थे।

संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए प्रो. कल्पलता पांडेय जी ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल गांधी जी को अपना गुरु मानते थे। गांधी जी के कहने पर सरदार जी ने प्रधानमंत्री का पद अस्वीकार कर दिया था। सरदार जी ने अपने परिवार के किसी भी सदस्य को दिल्ली आकर मिलने से स्पष्ट मना किया था। परिवारवाद को बढ़ावा न देकर राष्ट्रवाद को बढ़ावा देना उनका मुख्य उद्देश्य था।

प्रो. कल्पलता जी ने मुख्य अतिथि का सम्मान अंगवस्त्र व तुलसी का पौधा देकर किया।

 

संगोष्ठी मे उपस्थित लोगो का धन्यवाद ज्ञापन महाविद्यालय की शिक्षिका श्रीमती प्रतिभा गुप्ता ने किया।

कार्यक्रम में डॉ.अरुण कुमार दुबे, डॉ. रजनी श्रीवास्तव, डॉ. रचिता सिंह, जया तिवारी, श्रीमती अंकिता आदि शिक्षक-शिक्षिकाएं तथा छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

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