
प्रयागराज।पश्चिमाम्नाय द्वारिका शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य अनन्त श्रीविभूषित स्वामी श्री सदानन्द सरस्वती जी महाराज के पावन सान्निध्य एवं श्रीमद् आर्यावर्त विद्वत् परिषद् के तत्वावधान में प्रयाग स्थित मनकामेश्वर धाम में विद्वत् गोष्ठी एवं विद्वत् सम्मान समारोह सम्पन्न हुआ।
इस समारोह में प्रसिद्ध चिन्तक मनीषी डाक्टर रामजी मिश्र की कृति “शंकराचार्य और उनकी परम्परा “नामक पुस्तक का लोकार्पण पूज्य शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती जी महाराज ने किया।
संगोष्ठी में इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रयागराज के दर्शन विभागाध्यक्ष प्रोफेसर ऋषिकान्त पाण्डेय को विद्वत् परिषद् की “विद्वद भूषण “सम्मानोपाधि से विभूषित किया। प्रसिद्ध संस्था “हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग “का प्रधानमंत्री चुने जाने पर पंडित कुन्तक मिश्र को अभिनन्दित किया गया।
इस अवसर पर लोगों को सम्बोधित करते हुए जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि आद्य जगद्गुरु शंकराचार्य का अवतरण एक अलौकिक घटना मानी जाती है। भगवान शंकराचार्य का प्रात:स्मरणीय नाम प्रकाण्ड पाण्डित्य, योगसिध्दि, ब्रह्मनिष्ठा एवं महनीय विपुलकीर्ति, अद्भुत चरित आज भी किसी से छिपा नहीं है। उन्होंने अपने प्रकाण्ड पाण्डित्य, योगशक्ति से सत्य सनातन धर्म की अमरपताका को न केवल फहराया अपितु वेदों और शास्त्रों की परम्परा को अक्षुण्ण रखा और परम् पावन भारत भूमि से नास्तिकवाद का उन्मूलन किया। उनकी पवित्र परम्परा पर लेखनी चलाकर पण्डित रामजी मिश्र ने महनीय कार्य किया है। डाक्टर रामजी मिश्र ने अपनी कृति के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।
संगोष्ठी में प्रोफेसर ऋषिकान्त पाण्डेय एवं कुन्तक मिश्र ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
संगोष्ठी का संचालन डा अशोक कुमार पाण्डेय ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डाक्टर रामजी मिश्र ने किया। समारोह में नगर के गणमान्य नागरिक और विद्वान उपस्थित रहे।
