रिपोर्ट उपेन्द्र कुमार पांडेय, आजमगढ़ 

 

आजमगढ़। भगवान परशुराम जयंती चंद्रमा ऋषि आश्रम स्थित भगवान परशुराम मंदिर में अखिल भारत वर्षीय ब्राह्मण सभा, ब्राह्मण समाज कल्याण परिषद, ब्राह्मण एकता परिषद के संयुक्त तत्वावधान में मनायी गयी। मंदिर में स्थापित परशुराम जी की प्रतिमा का वैदिक रीति से पूजन कर उपस्थित लोगों ने माल्यार्पण किया।

आजमगढ़ के विभिन्न तहसीलों ब्लॉकों में परशुराम जी का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया बुढ़नपुर तहसील के राम प्रसाद तिवारी ने बताया कि परशुराम जी की मूर्ति जल्दी स्थापित कर आऊंगा ।

इस अवसर पर अखिल भारत वर्षीय ब्राह्मण सभा के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष पं. सुभाष चंद्र तिवारी कुन्दन एवं ब्राह्मण समाज कल्याण परिषद आजमगढ़ के अध्यक्ष पं. ब्रजेश नंदन पांडेय ने कहा कि भगवान विष्णु के छठवें अवतार भगवान परशुराम पराक्रम के कारक और सत्य के धारक हैं। योग, नीति एवं धनुर्विद्या के पारंगत परशुराम जी के जीवन से हमें अन्याय का विरोध करने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने विधर्मी सहस्रार्जुन सहित अनेक नास्तिक राजाओं का वध करके समाज में व्याप्त असुरक्षा, आतंक और भय को समाप्त कर धर्म की स्थापना की थी। महान तपस्वी परशुराम जी चिरंजीवी हैं। त्रेतायुग में श्रीराम को शारंग धनुष और द्वापर में श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र उन्होंने ही दिया था।

जीसएसटी कमिश्नर राजनाथ तिवारी एवं अन्य यजमान के हाथों आश्रम के महंत बमबम गिरि की देखरेख में पं. सुरेंद्र पांडेय, पं. सुभाष शास्त्री ने पूजन, हवन क्रिया संपन्न कराया।

इस मौके पर अखिलेश मिश्र गुड्डू, ब्राह्मण सभा के राष्ट्रीय संगठन मंत्री पं. संजय कुमार पांडेय, ब्राह्मण समाज कल्याण परिषद के महामंत्री पं. मनोज कुमार त्रिपाठी, ब्राह्मण एकता परिषद के जिलाध्यक्ष पं. भागवत तिवारी, पं. शर्मानंद पांडेय, पं. विश्वदेव उपाध्याय, मालती मिश्र, आनन्द उपाध्याय, पं. अभिषेक पांडेय, सतीश मिश्रा, मनीष मिश्रा, माहेश्वरी कांत पांडेय, गिरीश चतुर्वेदी, गिरिजा सुवन पांडेय, पं. गोविंद दुबे, महंत संजय पांडेय, सत्यप्रकाश तिवारी पप्पू, पंचदेव पांडेय, विरेन्द्र मिश्र, सतीश पाण्डेय, अरूण पाठक, गंगाशंकर मिश्र, आलोक पाठक, हरिवंश मिश्र, पंकज तिवारी, जगदम्बा उपाध्याय, राजन पांडेय, माधुरी दूबे, निरूपमा पाठक, तेज प्रताप पांडेय, राजन उपाध्याय, अवनीश पांडेय, राजन चौबे, राधेश्याम मिश्र, अवनीश चतुर्वेदी, संजय दूबे आदि मौजूद रहे।

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