छः दिवसीय कार्यशाला का हुआ समापन 

 

वाराणसी। शनिवार को अन्तर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र, बीएचयू, वाराणसी में 22 से 27 सितंबर 2025 तक छः दिवसीय ‘एकेडमिक लीडरशिप 5.0: नेविगेटिंग नेशनल एंड ग्लोबल ट्रेंड्स’ कार्यक्रम का समापन आई.यू.सी.टी.ई. परिसर, वाराणसी में हुआ। कार्यक्रम का शुभारम्भ मंगलाचरण से हुआ। समापन सत्र की अध्यक्षता प्रो० प्रेम नारायण सिंह, निदेशक, आईयूसीटीई, बीएचयू, वाराणसी ने की। प्रो० आशीष श्रीवास्तव, डीन (शैक्षणिक एवं शोध), आईयूसीटीई, वाराणसी ने कहा कि आज का नेतृत्व केवल प्रशासन नहीं, बल्कि वैश्विक प्रवृत्तियों के साथ शिक्षा को पुनर्परिभाषित करने की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि नेतृत्व को तकनीकी नवाचारों और वैश्विक सहयोग की दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। समापन सत्र के अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो० प्रेम नारायण सिंह, निदेशक, आईयूसीटीई, बीएचयू, वाराणसी ने इस कार्यक्रम की सफल समाप्ति पर सभी प्रतिभागियों को हार्दिक बधाई और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दीं साथ ही सभी संकाय सदस्यों, तकनीकी सदस्यों को साधुवाद दिया। इस सत्र में प्रतिभागियों ने अपने समूह प्रस्तुतीकरण प्रस्तुत किए।

प्रथम सत्र में डॉ. कुशाग्री सिंह, सहायक आचार्य,आईयूसीटीई, बीएचयू, वाराणसी ने “स्टूडेंट-सेंट्रिक अकैडमिक लीडरशिप: अंडरस्टैंडिंग लर्नर्स पर्सपेक्टिव्स” विषय पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक नेतृत्व को विद्यार्थियों की दृष्टि से सोचते हुए शिक्षण प्रक्रिया को अधिक संवेदनशील और प्रभावी बनाना चाहिए। दूसरे सत्र में प्रो० प्रेम नारायण सिंह, निदेशक, आईयूसीटीई, बीएचयू, वाराणसी ने “लीडरशिप फॉर स्टूडेंट वेल-बिइंग: सपोर्टिंग मेंटल हेल्थ एंड इमोशनल ग्रोथ” विषय पर सारगर्भित व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक नेतृत्व को विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक विकास को प्राथमिकता देनी चाहिए। साथ ही, इन्होंने आज के तीसरे सत्र में ‘समूह चर्चा एवं प्रस्तुति’ के अंतर्गत प्रतिभागियों से विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और छात्र-केंद्रित शैक्षणिक नेतृत्व पर विस्तार से चर्चा की। चौथे सत्र में फाइनल असेसमेंट एवं चर्चा आयोजित की गई, जिसमें सभी प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

इस छः दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम में देश के 20 से अधिक राज्यों यथा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र, नई दिल्ली इत्यादि के 100 से अधिक प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। इस कार्यशाला का संयोजन डॉ० अनिल कुमार और सह-संयोजन डॉ० सुनील कुमार त्रिपाठी द्वारा किया जा रहा है।

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