
वाराणसी।वसंत कन्या महाविद्यालय परिसर में एनी बेसेंट जी के जन्म दिवसोत्सव का शुभारंभ श्रीमती एनी बेसेंट जी के चित्र पर पुष्पांजलि साथ हुआ। तत्पश्चात महाविद्यालय की कुलगीत को संगीत विभाग के विभाग अध्यक्ष प्रोफेसर सीमा वर्मा के निर्देशन में तबले पर सौम्यकांत मुखर्जी का जी के संयोजन में प्रस्तुत किया गया। अतिथि का स्वागत महाविद्यालय की प्राचार्य प्रोफेसर रचना श्रीवास्तव द्वारा उत्तरीय तथा पुष्पगुच्छ प्रदान कर किया गया। अपने स्वागत उद्बोधन में प्राचार्य महोदया ने कहा कि श्रीमती ऐनी बेसेंट जी का जीवन दर्शन स्वामी विवेकानंद के दर्शन सदृश्य संपूर्ण मानवता में उस अद्वैत शक्ति को स्वीकार कर सम्पूर्ण मानवता के उन्नयन के लिए प्रयास करना था।’सभी का सम्पूर्ण विकास’ तथा इसी ध्येय की प्राप्ति हेतु महाविद्यालय निरंतर प्रयासरत है।कार्यक्रम के इस क्रम में श्रीमती एनी बेसेंट से संबंधित डॉक्यूमेंट्री प्रस्तुत की गई ।साथ ही हिंदी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर सपना भूषण की श्रीमती एनी बेसेंट पर आधारित पुस्तक का लोकार्पण किया गया ।
तत्पश्चात महाविद्यालय के ‘रंगमंच’ द्वारा डा.नैरजना श्रीवास्तव द्वारा रचित तथा निर्देशित नाटक के अन्तर्गत श्रीमती एनी बेसेंट जी तथा मालवीय जी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय के स्वरूप निर्माण, तथा महत्व एवं बेसेंट जी के अद्वितीय योगदान सम्बंधित अंतर्भाव को बड़े प्रभावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया। 
श्रीमती एनी बेसेंट जी के जन्म दिवसोत्सव पर आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला में निबंध प्रतियोगिता दिनांक 29/ 9/ 2025 को आयोजित की गई थी। जिसमें कुल 67 प्रतिभागियों ने प्रतिभा किया था।
उक्त प्रतियोगिता से संबंधित प्रमाण पत्र वितरण महाविद्यालय की प्राचार्य तथा सम्मानीय अतिथि द्वारा किया गया। प्रोफेसर कुमुद रंजन द्वारा अपने व्याख्यान में कहा कि श्रीमती एनी बेसेंट जी का जीवन प्रत्येक छात्रा के लिए एक प्रेरणा है।हम सभी को उनके जीवन तथा दर्शन को सम्पूर्ण मानवता के सम्पूर्ण विकास के लिए अंगीकार करना चाहिए। कार्यक्रम में हिंदी विभाग की विभाग अध्यक्ष प्रोफेसर आशा यादव ,दर्शन विभाग की विभाग अध्यक्ष प्रोफेसर ममता मिश्रा , इतिहास विभाग की विभागाध्यक्षा प्रो पूनम पांडे,डॉ मंजू कुमारी, डॉ पूर्णिमा, डॉ आरती कुमारी, डॉ आरती चौधरी, डॉ ऋषिकेश, डॉ शुभांगी श्रीवास्तव,डॉ पूनम , डॉ मालविका, डॉ राजलक्ष्मी आदि उपस्थित रहे कार्यक्रम का आयोजन डॉ प्रतिमा सिंह दर्शन विभाग द्वारा तथा संचालन डॉ प्रीति विश्वकर्मा द्वारा किया गया।
