महर्षि वाल्मीकि के आदर्श मानवता के पथप्रदर्शक : रामानंद दीक्षित

वाल्मीकि जयंती पर विचार एवं कवि गोष्ठी आयोजित

 

वाराणसी। अखिल भारतीय साहित्य परिषद, वाराणसी इकाई के तत्वावधान में राजकीय जिला पुस्तकालय के सभागार में वाल्मीकि जयंती के शुभ अवसर पर विचार गोष्ठी एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता क्वींस कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य रामानंद दीक्षित ने की। मुख्य अतिथि गिरीश कुमार पांडेय ‘काशिकेय’ तथा विशिष्ट अतिथि आलोक सिंह ‘बेताब’, बुद्धदेव तिवारी, सिद्धनाथ शर्मा ‘सिद्ध’ और विजय चंद्र त्रिपाठी रहे।

अध्यक्षीय संबोधन में रामानंद दीक्षित ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि के आदर्श आज भी मानवता के पथप्रदर्शक हैं। उन्होंने कहा कि हमें समाज में अपने आचरण को इस ऊँचाई तक ले जाना चाहिए, जहाँ से बुराई पीछे छूट जाए और केवल अच्छाई ही दिखाई दे। रत्नाकर डाकू से संत वाल्मीकि का बन जाना आज के समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। पुस्तकालयाध्यक्ष कंचन सिंह परिहार ने मां सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। इसके बाद कवि गोष्ठी का आरंभ हुआ, जिसमें कवियों ने गीत, ग़ज़ल और मुक्तक के माध्यम से वातावरण को भावपूर्ण बना दिया।

कवि गोष्ठी में वरिष्ठ गीतकार आलोक सिंह ‘बेताब’, बुद्धदेव तिवारी, सिद्धनाथ शर्मा ‘सिद्ध’, विजय चंद्र त्रिपाठी, रजनीकांत त्रिपाठी, डॉ. नसीमा निशा, डॉ. जगदीश गुप्ता, रामजतन पाल, गिरीश कुमार पांडेय, लियाकत अली ‘जलज’, विनोद कुमार वर्मा, डॉ. पुष्पेंद्र अस्थाना और सत्यम मिश्रा आदि ने काव्य पाठ किया।

इस अवसर पर सुधीर वर्मा, वर्षा गुप्ता, शुभम पांडेय, स्नेहा सहित अनेक साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे। अतिथियों का स्वागत पुस्तकालयाध्यक्ष कंचन सिंह परिहार ने किया, संचालन आनंद कृष्ण ‘मासूम’ ने किया और धन्यवाद ज्ञापन संतोष कुमार ‘प्रीत’ ने किया।

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