नृत्य-संगीत मिलन: 2025 में लोक नृत्यों की धूम

 

~ समूह लोक नृत्य में पहले स्थान पर ज्योति निकेतन, एटलस टैंक आजमगढ़ और सेंट जॉन स्कूल मड़ौली ने बाजी मारी

 

~ हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन में सेंट मैरी कॉन्वेंट स्कूल गाजीपुर और सेंट जॉन स्कूल मड़ौली ने लहराया परचम

 

वाराणसी। किसी व्यक्ति के जीवन में नृत्य-संगीत का मिलन होने से व्यक्तित्त्व और सामाजिक विकास दोनों होते हैं। संज्ञानात्मक, शैक्षिक और सामाजिक, सांस्कृतिक संतुलन की उत्पति संगीत से होती है। संगीत के बगैर मनुष्य अपने विकास की कल्पना नहीं कर सकता। विख्यात वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन, अब्दुल कलाम संगीत से प्रेम के कारण ही उच्च शिखर पर पहुँचते हैं। यह कहना है मुख्य अतिथि वाराणसी धर्मप्रान्त के धर्माध्यक्ष बिशप यूजिन जोसेफ का। वह शनिवार को नवसाधना कला केन्द्र के मिलन हाॅल में आयोजित नृत्य संगीत मिलन-2025, अंतरजनपदीय नृत्य-संगीत मिलन कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में बाल कलासाधकों को संबोधित कर रही थे। उन्होंने कहा कि मानवता को पहचानने में संगीत ही मदद करता है। प्रकृति के बीच में संगीत को संजोने की इच्छा-शक्ति से संगीत पुष्पित-पल्लवित होता है। इस यांत्रिक युग में धैर्य, एकाग्रता, संयम संगीत से प्राप्त होता है।

कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि द्वारा दीप प्रज्ज्वलन व प्रार्थना नृत्य से हुआ।

नवसाधना की कलासाधिकाओं ने भरतनाट्यम नृत्य विधा में स्वागत नृत्य प्रस्तुत किया। ‘आशा की ज्योति’ पिलग्रिम ऑफ़ होप पर आधारित नृत्य को आराधना, अनुजा, आकांक्षा, एमिलिना, अल्पना, सिस्टर अलीशा, रोनिता, रेखा, मेघा ने अपनी भाव भंगिमा और मुद्राओं से प्रस्तुत कर, सभी का मन मोह लिया।

पूर्णतया पारंपरिक शास्त्रीय धुनों पर आधारित नृत्य का संयोजन मीरा माधवन ने किया। निर्देशन फादर एस. जोसेफ ने किया।

प्रतियोगिता में हिंदुस्तानी शास्त्रीय समूह गायन, समूह लोक नृत्य को जूनियर और सीनियर दो वर्गों में बांटा गया था।

नृत्य संगीत मिलन समारोह में वाराणसी धर्म प्रांत के 28 स्कूलों ने प्रतिभाग किया।

जूनियर वर्ग में छठवीं से आठवीं और सीनियर वर्ग में नौवीं से 12वीं कक्षा के बाल कलाकार शामिल थे।

बाल कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का अप्रतिम प्रदर्शन किया। इंटर स्कूल नृत्य-संगीत मिलन के कला प्रदर्शन को दो श्रेणियों में विजेता घोषित किया गया।

सीनियर वर्ग के समूह लोक नृत्य में प्रथम स्थान पर सेंट फ्रांसिस स्कूल रामनगर व द्वितीय स्थान पर सेंट जाॅन स्कूल लेढूपूर और तृतीय स्थान पर जीवन ज्योति स्कूल सारनाथ रहा।

जूनियर वर्ग मे समूह लोक नृत्य में प्रथम स्थान पर ज्योति निकेतन स्कूल और एटलस टैंक आजमगढ़ दूसरे स्थान पर सेंट मैरी कॉन्वेंट स्कूल कैंट वाराणसी और तीसरे स्थान पर सेंट जोसेफ कॉन्वेंट स्कूल शिवपुर रहा।

सीनियर वर्ग के हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन में प्रथम स्थान पर सेंट जॉन स्कूल मड़ौली व द्वितीय स्थान पर सेंट जॉन स्कूल बीएलडब्ल्यू और तृतीय स्थान पर सेंट जॉन स्कूल गाज़ीपुर रहा।

जूनियर वर्ग से हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन में सेंट मैरी कॉन्वेंट स्कूल, गाज़ीपुर को पहला और फातिमा स्कूल जाजपुर मऊ को दूसरा व सेंट जॉन स्कूल सिद्दिकीपुर, जौनपुर को तीसरा स्थान मिला।

सभी विजेताओं को पदक और पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया गया।  दोनों वर्गों के प्रथम स्थान पर संस्कृति गुप्ता, आराधना मिश्रा, जया भट्टाचार्य लकी सिंह, विनम्र चतुर्वेदी, अनुष्का उपाध्याय, आशीष, आकाश, आफिया खान, अंजना, अभिषेक राय, असित राय, परिधि, स्वर्णिमा, सांझ, रौनक, अश्विनी यादव, लावण्या यादव, सिद्धि पाण्डेय, कृष्णाक्षी, आराध्या वर्मा, गर्ग उपाध्याय, श्रेया सिंह, श्रेया कुमारी, प्रार्थना, अविका, श्रेयांशी, हर्षिता, वैष्णवी सिंह रहीं।

गायन के निर्णायक मंडल में गोविंद वर्मा, आशुतोष मिश्र और अनीता कुमारी तथा नृत्य के लिए प्रार्थना सिंह, मीरा माधवन और सौरभ त्रिपाठी शामिल रहे। प्रतियोगिता के नियमों को फादर थॉमस मैथ्यू ने बताया। महोत्सव का संचालन सेंट जॉन स्कूल बीएलडब्ल्यू के गुरु संत राज तथा नवसाधना कला केन्द्र की कलासाधिका अनीशा, आराधना और शिवानी वर्मा ने किया। धन्यवाद ज्ञापन सेंट मैरी स्कूल कैंट की प्रधानाचार्य सिस्टर जमीला ने किया।

इस मौके पर फादर जाॅन अब्राहम, फादर फ्रांसिस डि’सूजा, फादर एस. जोसफ, फादर रोजन, सिस्टर सरला, सिस्टर मंजू समेत सैकड़ों कलाप्रेमी मौजूद रहे।

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