वाराणसी ।रामघाट स्थित सॉन्गवेद विद्यालय में रविवार को भगवान धन्वंतरि की जयंती मनाई गई। भगवान धन्वंतरि जी की पूजा विद्यालय के अध्यक्ष पं विश्वेश्वरशास्त्री द्रविड़ जी ने की।पूजन के पश्चात पं दिनेश रामनाथ जोशी जी की अध्यक्षता में विद्वत सभा संपन्न हुई।

श्री जोशी जी ने कहा कि आज धन्वंतरि जयंती है,हमें धर्म की रक्षा करनी चाहिए। सभी लोगों को अपने घरों में माता-पिता एवं वृद्ध लोगों का आदर करना चाहिए ।अपने स्वास्थ्य की रक्षा के लिए लोगों को आयुर्वेद का अभ्यास करना चाहिए।

उपस्थित विद्वानों ने कहा कि आयुर्वेद की चिकित्सा सर्वांगीण चिकित्सा है।आयुर्वेदिक चिकित्सा से शरीर में दूसरे रोगों का उद्भव नहीं होता है ।अंग्रेजों के शासनकाल में भारतवर्ष में शल्य चिकित्सा के जानकार व्यक्तियों में से कई व्यक्तियों को विदेश ले जाया गया था। भारतवर्ष में जो लोग शल्य चिकित्सा करना सीखते थे ऐसे चिकित्सक विद्वानों का हाथ काट दिया जाता था। इसलिए भारतवर्ष में आयुर्वेद विद्या में शल्य चिकित्सा लुप्त हो गई।

विद्यालय के अध्यक्ष पं विशेश्वरशास्त्री द्रविड़ जी ने कहा कि इस विद्यालय में आयुर्वेद के उन्नयन के लिए अनेक तरह के प्रयास किए गए हैं ।वर्तमान में विशुद्ध संस्कृत विद्या मंदिर संरक्षण कोष इस कार्य के लिए कटिबद्ध है।सुयोग्य व्यवस्था होने पर आयुर्वेद के अध्ययन अध्यापन की व्यवस्था पुन: शुरू की जाएगी। दक्षिणा प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।

विद्वत सभा में प्रमुख रूप से पद्मश्री पं गणेश्वरशास्त्री द्रविड़, वेदमूर्ति महेश चंद्रकांत रेखे, वेदमूर्ति देवेंद्र रामचंद्र गढी कर, पं देवव्रत महेश रेखे, पं राजराजेश्वर शास्त्री द्रविड़, पं वेंकटेश्वरशास्त्री द्रविड़,भालचंद्र बादल, चक्रवर्ती विजय नावड सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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